खूंखार नक्सली माड़वी हिडमा के लिए बजे गाने, पूर्व मंत्री अमरजीत भगत बोले- जल, जंगल और जमीन का संरक्षण करने वाले को समर्थन

जगदलपुर/रायपुर. छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में भूमकाल स्मृति दिवस की रैली में खूंखार नक्सली माड़वी हिडमा के लिए गीत बजाए गए, जिसपर आदिवासी झूम उठे. कांग्रेस ने सरकार पर सवाल खड़े किए. राज्य के पूर्व मंत्री अमरजीत भगत का बड़ा बयान सामने आया है. उन्होंने कहा कि जो जल, जंगल और जमीन का संरक्षण करेगा, उसको समर्थन मिलेगा. जो जल, जंगल और जमीन की लूट करेगा, उसका विरोध होगा. चाहें कोई संगठन हो, सरकार हो या कोई कंपनी. सभी का विरोध किया जाएगा. उन्होंने कहा कि इस समय बस्तर सहित पूरे प्रदेश में जो स्थिति बन रही है, इसमें खनिज संपदा की लूट हो रही है. लोगों के संवैधानिक अधिकारों का हनन हो रहा है. कोई अपने अधिकार की बात करता है, तो उसे नक्सली बताकर मार दिया जाता है. क्या आप हिडमा को जल, जंगल और जमीन का रखवाला मानते हैं, इस सवाल पर अमरजीत भगत ने कहा कि केवल हिडमा की बात नहीं बल्कि जो संरक्षण करेगा, उसकी बात है. चाहें कांग्रेस हो, बीजेपी हो, आदिवासी हो, सभी को उनका समर्थन मिलेगावहीं इस मामले में कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि कांग्रेस हमेशा नक्सलियों के साथ रही है. झीरम घाटी के नाम पर केवल घड़ियाली आंसू बहाए जाते हैं. यह इस बात को साबित करती है. सालों बाद नक्सलवाद समाप्त होने पर कांग्रेस को पीड़ा है. कांग्रेस बस्तर में विकास नहीं चाहती. कांग्रेस ने हमेशा नक्सलियों को आश्रय दिया. राज बब्बर, दिग्विजय सिंह समेत सीनियर नेताओं ने खुले मंच से नक्सलियों का समर्थन किया है.
पिछले साल मारा गया माड़वी हिडमा
सुरक्षाबलों ने पिछले साल नवंबर में 6 हार्डकोर नक्सलियों को मार गिराया था. इसमें खूंखार नक्सली माड़वी हिडमा और उसकी पत्नी राजे उर्फ रज्जका भी शामिल थे. हिडमा पर एक करोड़ रुपये का इनाम था. 26 से ज्यादा हमलों के मास्टरमाइंड हिडमा को खुफिया इनपुट के बाद ग्रेहाउंड फोर्स ने चार घंटे की मुठभेड़ कार्रवाई में ढेर कर दिया था. दंडकारण्य के जंगल, लोकल नेटवर्क और लगातार कैंप बदलने की रणनीति ने उसे वर्षों तक सुरक्षाबलों की पकड़ से दूर रखा.
कौन था माड़वी हिडमा?
माड़वी हिडमा के सुकमा जनपद से ताल्लुक रखता था. वह साल 1996 में नक्सल संगठन में शामिल हुआ था. हिडमा पीएलजीए यानी पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी बटालियन एक का कमांडर था. वह पीएलजीए का प्रमुख था. हिडमा AK-47 सहित कई एडवांड हथियारों का जानकार था, साथ ही वह गुरिल्ला वार फेयर और जंगल की लड़ाई में महारत रखता था. वह कई बड़ी घटनाओं का मास्टरमाइंड था. इनमें 76 CRPF जवानों की हत्या की घटना भी शामिल है. इसके अलावा झीरम घाटी हत्याकांड में भी उसकी भूमिका संदिग्ध थी.


