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केवल ‘सामान्य आरोपों’ पर दहेज हत्या में सजा नहीं दी जा सकती; सुप्रीम कोर्ट ने सास को बरी किया

सुप्रीम कोर्ट ने दहेज हत्या के एक मामले में सास की सजा को रद्द करते हुए उसे बरी कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया
कि उत्पीड़न के केवल ‘सामान्य आरोप’ (General Allegations), बिना किसी विशिष्ट घटना के जो “मौत से ठीक पहले” (Soon before death) हुई हो, भारतीय दंड
IPC) की धारा 304-B के तहत सजा बनाए रखने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने मुन्नी देवी द्वारा दायर अपील को स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत
उन्हें आईपीसी की धारा 304-B (दहेज हत्या) और धारा 316 (अजन्मे बच्चे की मृत्यु कारित करना) के आरोपों से बरी कर दिया। कोर्ट ने पाया
कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि मृतका को उसकी आत्महत्या से ठीक पहले दहेज की मांग के संबंध


