सुबह 10:30 बजे ही क्यों फहराया जाता है तिरंगा? जानिए गणतंत्र दिवस परेड और टाइमिंग का ‘सीक्रेट’ कनेक्शन

आज का दिन यानी केवल परेड और झांकियों का नहीं, बल्कि उन बारीकियों को समझने का भी है, जो भारतीय होने के नाते हमें दूसरों से अलग और जागरूक बनाती हैं. इस भव्य उत्सव के बीच समय की पाबंदी और झंडा फहराने की रस्म को लेकर कई ऐसे रोचक तथ्य हैं, जिन्हें जानकर आप दंग रह जाएंगे. आखिर क्यों 10:30 बजे का ही समय चुना गया? क्यों राष्ट्रपति ही आज के नायक होते हैं, प्रधानमंत्री नहीं? और सबसे जरूरी बात-‘फहराने’ और ‘रोहण’ के बीच का अंतर क्या है.अक्सर लोग 26 जनवरी को ‘Flag Hoisting’ कह देते हैं, जो गलत है.
- 15 अगस्त (Flag Hoisting): स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा नीचे से ऊपर ले जाया जाता है और फिर फहराया जाता है. यह नए राष्ट्र के उदय का प्रतीक है.
- 26 जनवरी (Flag Unfurling): गणतंत्र दिवस पर तिरंगा पहले से ही पोल के ऊपर बंधा होता है. राष्ट्रपति केवल रस्सी खींचकर उसे खोलते हैं. इसे हिंदी में ‘झंडा फहराना’ कहते हैं. इसका मतलब है कि हम पहले से ही स्वतंत्र हैं और अब अपना संविधान सेलिब्रेट कर रहे हैं.
सुबह 10:30 बजे का ‘मुहूर्त’ और टाइमिंग का गणित
गणतंत्र दिवस की परेड और झंडा फहराने का समय बेहद सटीक होता है. इसके लिए सुबह 10:30 बजे का समय चुना गया है क्योंकि इससे पहले राष्ट्रपति भवन से ‘कर्तव्य पथ’ तक राष्ट्रपति की भव्य बग्गी या कार का काफिला पहुंचता है.
10:25 AM: प्रधानमंत्री और मुख्य अतिथि का आगमन.
10:30 AM: राष्ट्रपति द्वारा तिरंगा फहराना और राष्ट्रगान.
10:31 AM: 21 तोपों की सलामी के साथ परेड का आगाज.
10:32 AM: परेड कमांडर द्वारा मार्च-पास्ट की अनुमति लेना और परेड शुरू होना. इस समय को इस तरह रखा गया है कि धुंध (Fog) कम हो जाए और आसमान साफ रहे. इससे फ्लाईपास्ट (Flypast) में विमानों की विजिबिलिटी बेहतर होती है.
1. राष्ट्रपति का आगमन और प्रोटोकॉल (The Protocol)
गणतंत्र दिवस समारोह की शुरुआत राष्ट्रपति भवन से होती है. राष्ट्रपति (जो देश के प्रथम नागरिक और सेनाओं के सर्वोच्च कमांडर हैं) अपनी विशेष बग्गी या कार से कर्तव्य पथ के लिए प्रस्थान करते हैं. उनके आगमन, प्रधानमंत्री द्वारा उनकी अगवानी करने और फिर उन्हें मंच तक लाने में जो समय लगता है, उसे देखते हुए 10:30 बजे का समय सबसे सटीक बैठता है.
2. ‘गणतंत्र’ की घोषणा का ऐतिहासिक समय
26 जनवरी 1950 को जब भारत का संविधान लागू हुआ था, तब भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने सुबह 10:24 बजे शपथ ली थी और उसके ठीक बाद करीब 10:30 बजे के आस-पास ही भारत को ‘संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य’ घोषित करते हुए पहली बार तिरंगा फहराया गया था. उसी ऐतिहासिक पल को सम्मान देने के लिए आज भी यही समय चुना जाता है.
3. झांकियों और रोशनी का गणित
सुबह 10:30 बजे गणतंत्र दिवस परेड शुरू होने का मतलब है कि समारोह दोपहर 12:00 से 12:30 बजे तक चलेगा. यह समय फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और दुनिया भर में लाइव प्रसारण के लिए ‘बेस्ट लाइट’ प्रदान करता है.
राष्ट्रपति ही क्यों फहराते हैं तिरंगा, प्रधानमंत्री क्यों नहीं?
यह सवाल कई बार प्रतियोगी परीक्षाओं के जनरल नॉलेज यानी सामान्य ज्ञान सेक्शन में भी पूछा जाता है. 15 अगस्त को प्रधानमंत्री झंडा फहराते हैं क्योंकि वे देश के राजनीतिक प्रमुख होते हैं. लेकिन 26 जनवरी ‘संविधान’ लागू होने का दिन है और राष्ट्रपति देश के संवैधानिक प्रमुख (Constitutional Head) होते हैं. इसलिए आज के दिन झंडा फहराने का गौरव राष्ट्रपति को मिलता है.
गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि और ‘वंदे मातरम्’ की गूंज
इस साल यानी 2026 में यूरोपीय संघ के नेताओं का मुख्य अतिथि बनना भारत की वैश्विक ताकत को दिखाता है. परेड में इस बार की थीम ‘वंदे मातरम् के 150 वर्ष’ रखी गई है. यही कारण है कि इस बार की झांकियों में आधुनिक मिसाइलों के साथ-साथ हमारे सांस्कृतिक गीतों का वो तालमेल दिख रहा है जो शायद ही पहले कभी दिखा हो.



