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बाजार के पनीर को पीछे छोड़ता बघेलखंड का देसी स्वाद, बना लोगों की पहली पसंद, मिलेगी घर जैसी ताजगी

बदलते खान-पान के दौर में जब बाजार में मिलने वाले खाद्य पदार्थों की शुद्धता पर सवाल खड़े हो रहे हैं तब बघेलखंड की पारंपरिक रसोई से जुड़ा देसी बघेली पनीर एक बार फिर चर्चा में है. स्वाद, सेहत और परंपरा का अनोखा संगम यह पनीर न सिर्फ बाजार के पनीर से ज्यादा पौष्टिक माना जाता है बल्कि इसकी खुशबू और मुलायम बनावट भी इसे खास बनाती है. वर्षों से बघेलखंड की महिलाएं इसी देसी तरीके से घरों में पनीर बनाती आ रही हैं. समय के साथ आधुनिकता जरूर आई है लेकिन इस पनीर की आत्मा आज भी वही पारंपरिक स्वाद और शुद्धता है जो इसे आम पनीर से अलग पहचान देती है.

बघेली पनीर का देसी तरीका
बघेलखंड में पनीर बनाना केवल एक रेसिपी नहीं बल्कि घरेलू परंपरा का हिस्सा रहा है. यहां की महिलाएं अपने अनुभव और घरेलू ज्ञान के आधार पर पनीर तैयार करती हैं जिसे किसी किताब या रसोई स्कूल से सीखने की जरूरत नहीं पड़ती. लोकल 18 से बातचीत में बघेलखंड निवासी उर्मिला मिश्रा बताती हैं कि यह पनीर बनाना बेहद आसान है और इसके लिए किसी खास मशीन या महंगे सामान की आवश्यकता नहीं होती. सिर्फ शुद्ध दूध और थोड़ी सी सावधानी से घर में बेहतरीन पनीर तैयार हो जाता है.

शुद्धता और सेहत का भरोसा
देसी बघेली पनीर की सबसे बड़ी खासियत इसकी शुद्धता है. इसमें न तो किसी तरह का केमिकल इस्तेमाल होता है और न ही मिलावट की गुंजाइश रहती है. यही वजह है कि यह पनीर बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए भी सुरक्षित माना जाता है. बाजार में मिलने वाला पनीर कई बार लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए प्रिजर्वेटिव से तैयार किया जाता है जबकि घर में बना बघेली पनीर पूरी तरह ताजा होता है और उसी दिन या अगले दिन तक इस्तेमाल कर लिया जाता है.

बनाने की प्रक्रिया में छिपा है खास स्वाद
उर्मिला मिश्रा बताती हैं कि एक लीटर दूध को अच्छे से उबालने के बाद उसे हल्का ठंडा कर उसमें थोड़ी मात्रा में पानी और व्हाइट विनेगर मिलाया जाता है, जिससे दूध फटकर छेना और पानी अलग हो जाता है. इसके बाद सफेद सूती कपड़े से छानकर छेना निकाला जाता है. ध्यान रखें कि छेना को बहुत ज्यादा दबाया नहीं जाता ताकि पनीर ज्यादा सख्त न हो और उसमें हल्की स्पंजीनेस बनी रहे. वहीं पनीर क्षनने के बाद निकलने वाला पानी फेंका नहीं जाता. इस पानी का उपयोग सब्जी, दाल या ग्रेवी में किया जाता है जिससे पोषण और स्वाद दोनों बढ़ते हैं. अब इस पोटली को 2 किलो के वजन के आस पास वाले किसी समान से दबा दे और बस 10-20 मिनट में आपका घर का बना बघेलखण्डी पनीर तैयार हो जाएगा.

आज भी कायम है देसी पनीर की पहचान
तेजी से बदलते समय में भले ही बाजार ने कई विकल्प दिए हों लेकिन बघेलखंड के घरों में आज भी देसी बघेली पनीर की अपनी खास जगह है. यह पनीर सिर्फ एक खाद्य पदार्थ नहीं बल्कि बघेलखंड की सांस्कृतिक पहचान, घरेलू समझ और आत्मनिर्भर जीवनशैली का प्रतीक है जो आने वाली पीढ़ियों को भी सेहत और स्वाद का सही रास्ता दिखाता रहेगा

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