40 दिन में तैयार, कम लागत में जबरदस्त कमाई, वजन घटाने वाली इस सब्जी की फरवरी में ऐसे करें बुवाई और कमाएं मुनाफा

रामपुर: उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए अब एक ऐसी खास फसल नई उम्मीद बनकर उभरी है, जो कम समय में तैयार होती है और बाजार में इसकी मांग लगातार बनी रहती है. इस फसल का नाम है जुकीनी, जो तेजी से तैयार होने वाली और बाजार में ज्यादा डिमांड रखने वाली सब्जी है. यह फसल जल्दी तैयार हो जाती है और बार-बार हार्वेस्टिंग की जा सकती है. कम लागत, लगातार तुड़ाई और बड़े शहरों से लेकर विदेशों तक इसकी मांग होने की वजह से किसान इससे अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं.
किसान ने कमाया अच्छा मुनाफा
के किसान जुनैद ने इस बार 8 बीघा जमीन में हरी जुकीनी की खेती की है. जुकीनी को कम समय में तैयार होने वाली और बाजार में तेजी से बिकने वाली सब्जी माना जाता है. किसान जुनैद बताते हैं कि जुकीनी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह फसल सिर्फ 40 दिनों में तैयार हो जाती है. एक बीघा में लगभग 150 ग्राम बीज की जरूरत पड़ती है और एक बीघा से औसतन चार क्विंटल तक पैदावार मिल जाती है. उन्होंने अक्टूबर महीने में इसकी बुवाई की थी और अब तक तीन से चार बार हार्वेस्टिंग हो चुकी है. खास बात यह है कि अभी करीब दो महीने तक यह फसल और चलेगी, यानी किसान को लगातार आमदनी मिलती रहेगी.
जुकीनी की मार्केट में डिमांड
जुनैद ने बताया कि पिछली बार उन्होंने चार बीघा में जुकीनी की खेती की थी, जिसमें कुल लागत करीब 30 हजार रुपये आई थी. वहीं, एक बीघा से 70 से 80 हजार रुपये तक का शुद्ध मुनाफा हुआ था. इसी अच्छे अनुभव के चलते इस बार उन्होंने खेती का रकबा बढ़ाकर आठ बीघा कर दिया. उनका कहना है कि जुकीनी की डिमांड लगातार बढ़ रही है, खासकर बड़े शहरों और विदेशों में. रामपुर से तैयार होने वाली हरी जुकीनी पहले की बड़ी मंडियों में जाती है, जहां से इसे विदेशों तक सप्लाई किया जाता है. यही वजह है कि किसानों को इसका अच्छा भाव मिलता है.जुकीनी की खेती के लिए जरूरी बातें
जुकीनी की खेती में कुछ बातों का खास ध्यान रखना जरूरी होता है. इसकी बुवाई अक्टूबर से नवंबर या फिर फरवरी-मार्च में की जा सकती है. जुकीनी को हल्की दोमट मिट्टी सबसे ज्यादा पसंद होती है, जिसमें पानी का निकास अच्छा हो. खेत की जुताई अच्छे से करके पाटा लगाना जरूरी होता है, ताकि मिट्टी भुरभुरी हो जाए.
ज़ुकीनी की खेती के लिए सिंचाई
जुकीनी की फसल में पानी की जरूरत ज्यादा नहीं होती, लेकिन समय पर सिंचाई बहुत जरूरी है. शुरुआती दिनों में छह से सात दिन में एक बार पानी देना ठीक रहता है. जैसे-जैसे फसल बढ़ती है, वैसे-वैसे जरूरत के हिसाब से पानी दिया जाता है. ज्यादा पानी देने से फसल खराब भी हो सकती है, इसलिए संतुलन बनाए रखना जरूरी होता है.
खाद की बात करें तो गोबर की सड़ी खाद या वर्मी कम्पोस्ट डालने से पैदावार बेहतर होती है. इसके साथ ही समय-समय पर निराई-गुड़ाई करते रहना चाहिए, ताकि खरपतवार फसल को नुकसान न पहुंचा सके.
सेहत के लिए फायदेमंद
जुकीनी सिर्फ किसानों के लिए ही नहीं, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद मानी जाती है. इसमें फाइबर भरपूर मात्रा में होता है, जो पाचन को दुरुस्त रखता है. यह वजन घटाने में मददगार होती है और दिल के मरीजों के लिए भी फायदेमंद मानी जाती है. जुकीनी में कैलोरी कम होती है, इसलिए आजकल हेल्थ कॉन्शियस लोग और जिम जाने वाले इसे खूब पसंद कर रहे हैं.



