Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana: फसल बीमा से जुड़ी हर समस्या का समाधान, अब फोन पर

नईदिल्ली: Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana, किसानों को अब फसल बीमा को लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं है। केंद्र सरकार ने इस संबंध में हेल्पलाइन और डिजिटल माध्यमों को सक्रिय कर दिया है, जिससे किसान आसानी से अपनी समस्याओं का समाधान प्राप्त कर सकते हैं।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत किसानों की सहायता के लिए टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 14447 जारी किया गया है। इसके अलावा, कृषि रक्षक पोर्टल, चैट बॉक्स और क्रॉप इंश्योरेंस ऐप भी पहले से उपलब्ध हैं। किसान बीमा क्लेम में किसी भी प्रकार की समस्या आने पर इन माध्यमों का उपयोग कर सकते हैं।
केंद्र सरकार ने इस योजना की अवधि 2025-26 तक बढ़ा दी है और इसके लिए ₹69,515.71 करोड़ का प्रावधान किया गया है। यह योजना छोटे एवं सीमांत किसानों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती है और प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान की भरपाई करती है।
बीमा क्लेम से जुड़ी जानकारी कैसे प्राप्त करें?
किसान टोल फ्री नंबर 14447 पर कॉल कर सकते हैं।
वॉट्सऐप नंबर 7065514447 पर मैसेज भेजकर भी जानकारी ली जा सकती है।
केवल NCIP पोर्टल पर रजिस्टर्ड किसानों के लिए चैटबॉट सुविधा उपलब्ध है।
किसान क्रॉप इंश्योरेंस ऐप डाउनलोड कर समाधान प्राप्त कर सकते हैं।
मुआवजा किन आधारों पर दिया जाता है?
फसल क्षतिपूर्ति का आकलन उपज के आंकड़ों के आधार पर किया जाता है।
अगर किसी स्थानीय आपदा से फसल को नुकसान हुआ हो, तो किसान टोल फ्री नंबर पर संपर्क कर सकते हैं।
Digi Claim प्रणाली के तहत ग्राम पंचायत स्तर (GP लेवल) पर उपज की गणना कर ऑटोमैटिक रूप से दावा भेजा जाता है।
कटाई के बाद 14 दिनों तक खेतों में रखी गई फसल के नुकसान पर ही मुआवजा दिया जाता है।
शिकायत कैसे दर्ज कराएं?
किसान टोल फ्री नंबर पर कॉल कर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
बीमा कर्मचारी किसान से नाम, फोन नंबर, पता (गांव एवं जिला) और स्कीम से जुड़ी जानकारी लेगा।
अधूरी जानकारी के आधार पर शिकायत दर्ज नहीं की जाएगी।
किन आपदाओं में मिलेगा बीमा लाभ?
फसल बीमा के तहत बेमौसम बारिश, बाढ़, सूखा, चक्रवात, ओलावृष्टि, आगजनी और कीट संक्रमण जैसी प्राकृतिक आपदाओं को शामिल किया गया है।
फसल नुकसान का आकलन नई तकनीक से
केंद्र सरकार ने क्लेम भुगतान में गड़बड़ियों से बचने के लिए रिमोट सेंसिंग तकनीक को अपनाने का फैसला किया है। इसके तहत कम से कम 30% नुकसान का आकलन अनिवार्य किया गया है।
हर भाषा में सुविधा, बिना किसी शुल्क के
सरकार ने किसानों को उनकी स्थानीय भाषा में सहायता देने की व्यवस्था की है। टोल फ्री नंबर सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक उपलब्ध रहेगा और समाधान प्राप्त करने के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। अब किसान आसानी से अपनी समस्याओं का समाधान पा सकते हैं और फसल बीमा योजना का लाभ उठा सकते हैं।