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HCQ के एपीआई और उसके फॉर्मूलेशन का होगा निर्यात, देश में हटाया गया बैन | Department of Pharmaceuticals has approved the lifting of ban on Export of Hydroxychloroquine API | nation – News in Hindi

HCQ के एपीआई और उसके फॉर्मूलेशन का होगा निर्यात, देश में हटाया गया बैन

कोरोना वायरस से बचाव में कारगर मानी जा रही है एचसीक्‍यू.

भारत सरकार के उवर्रक विभाग के अंतर्गत आने वाले फार्मास्‍यूटिकल विभाग ने हाइड्रॉक्‍सीक्‍लोरोक्‍वीन (HCQ) के एक्टिव फार्मास्‍यूटिकल इंग्रेडियंट्स और उसके फॉर्मूलेशन के निर्यात पर लगाई गई रोक को हटाने के लिए लिए सहमति दे दी है.

नई दिल्‍ली. देश-दुनिया में कहर बरपा रहे कोरोना वायरस संक्रमण (Coronavirus) से बचाव की दवा के रूप में इस्‍तेमाल की जा रही मलेरिया की दवा हाइड्रॉक्‍सीक्‍लोरोक्‍वीन (HCQ) को लेकर दुनिया भर में ट्रायल चल रहा है. विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (डब्‍ल्‍यूएचओ) ने पिछले दिनों इसके क्‍लीनिकल ट्रायल पर अपनी ओर से लगाया गया बैन हटा लिया. अब भारत सरकार के उवर्रक विभाग के अंतर्गत आने वाले फार्मास्‍यूटिकल विभाग ने हाइड्रॉक्‍सीक्‍लोरोक्‍वीन (HCQ) के एक्टिव फार्मास्‍यूटिकल इंग्रेडियंट्स और उसके फॉर्मूलेशन के निर्यात पर लगाई गई रोक को हटाने के लिए लिए सहमति दे दी है. यह जानकारी केंद्रीय मंत्री सदानंद गौड़ा ने बुधवार को ट्वीट करके दी.

केंद्रीय मंत्री सदानंद गौड़ा के अनुसार इसके निर्यात से जुड़ी एसईजेड और ईओयू यूनिट को घरेलू बाजार में कुल उत्‍पादन का 20 फीसदी सप्‍लाई करना होगा. उनके मुताबिक डायरेक्‍टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड से इस संबंध में आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी करने के लिए कहा गया है.

 

बता दें कि इससे पहले डब्‍ल्‍यूएचओ की ओर से एचसीक्‍यू के क्‍लीनिकल ट्रायल पर लगाए गए प्रतिबंध को वापस लेने पर भारतीय विशेषज्ञों ने प्रतिक्रिया दी थी. कोविड-19 के संभावित उपचार के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा अपने वैश्विक क्लिनिकल ट्रायल में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन (एचसीक्यू) का पुनः परीक्षण करने के निर्णय को विशेषज्ञों ने सही दिशा में उठाया गया कदम बताया था और कहा था कि इसका कोई भी सकारात्मक नतीजा वैश्विक स्तर पर लोगों के वृहद हित में होगा.

डब्ल्यूएचओ ने इससे पहले सुरक्षा कारणों से कोविड-19 के इलाज के लिए संभावित दवाओं के परीक्षण में से एचसीक्यू का क्‍लीनिकल ट्रायल स्थगित कर दिया था. सुरक्षा से संबंधित आकंड़ों की समीक्षा के बाद डब्ल्यूएचओ ने कहा था कि परीक्षण किया जाना चाहिए.

डब्ल्यूएचओ के निर्णय का स्वागत करते हुए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक डॉ बलराम भार्गव ने कहा था, ‘जैविक स्वीकार्यता, प्रयोगशाला से प्राप्त आंकड़ों और अध्ययन के आधार पर एचसीक्यू पर दिए गए सुझावों पर आईसीएमआर और भारत अडिग रहा है. यह दशकों तक इस्तेमाल की गई दवा है. क्‍लीनिकल ट्रायल से प्राप्त कोई भी सकारात्मक नतीजा वैश्विक स्तर पर लोगों के वृहद हित में होगा.’

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First published: June 10, 2020, 11:43 PM IST



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