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झारखंडः पू्र्व CM रघुबर दास बोले- COVID-19 से जंग में नाकाम साबित हो रही हेमंत सरकार

झारखंड में कोरोना वायरस से निपटने की प्रदेश सरकार की तैयारियों पर रघुबर दास ने निशाना साधा.

कोरोना वायरस (Coronavirus) के खतरे से निपटने को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास ने झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार पर निशाना साधा.

नई दिल्ली. झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास (Raghubar Das) ने कहा है कि राज्य सरकार अपनी विफलता का ठीकरा केंद्र सरकार पर फोड़ना चाह रही है. कोरोना वायरस (Coronavirus) के खतरे से निपटने को लेकर झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार पर निशाना साधते हुए राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री ने यह आरोप लगाया है. उन्होंने कहा है कि केंद्र सरकार ने कोरोना से परेशान गरीब, जरूरतमंदों के लिए खजाने खोल दिए हैं.  जबकि झारखंड सरकार ने अपने खजाने का मुंह बंद कर रखा है. रघुवर दास का आरोप है कि राज्य सरकार चाहती है कि हर काम केंद्र सरकार ही करे.

पूर्व सीएम ने कही ये बात
केंद्र सरकार की तरफ से राज्य सरकार को दी गई मदद का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि झारखंड को प्रधानमंत्री वन धन योजना के तहत 415 करोड़ रुपए, मनरेगा के तहत 602 करोड़ रुपए, एसडीआरएम फंड के लिए 284 करोड़ रुपए की सीधी आर्थिक सहायता दी गई है. इसके अलावा पीएम किसान योजना के तहत झारखंड में 2000 रुपए प्रति किसान, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत राशन कार्डधारियों को अगले तीन माह तक अतिरिक्त पांच किलो चावल या गेहूं, एक किलो दाल देने का निर्णय केंद्र सरकार ने लिया है.

रघुवर दास ने केंद्र सरकार की सहायता का जिक्र करते हुए कहा है कि दिव्यांगों और विधवाओं को 1000 रुपए की सहायता और सभी जन धन खाताधारकों के खाते में अगले तीन महीने तक 500-500 रुपए की सहायता दी जा रही है. उज्जवला योजना के तहत तीन माह तक फ्री सिलिंडर भी दिया जा रहा है. इसके अलावा मनरेगा में मजदूरी 182 रुपए से बढ़ाकर 202 रुपए कर दिया गया है. लेकिन अब राज्य सरकार बताए कि केंद्र सरकार से मिली सहायता को उसने जमीन पर कितना उतारा है. साथ ही खुद के फंड से राज्य सरकार ने क्या किया है.सरकार पर लगाए ये आरोप
राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया है कि झारखंड सरकार कोरोना के मामले में ठोस कदम उठाने की बजाय केंद्र का रोना रो रही है. राज्य सरकार न तो विधि व्यवस्था संभाल पा रही है न ही लोगों को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया करा पा रही है. राहत कार्य की असलियत तो जगज़ाहिर है. जो लोग दूसरे राज्यों में फंसे हैं उनमें 90% को राज्य सरकार की तरफ से कोई सहायता नहीं मिली है. पूर्व मुख्यमंत्री ने झारखंड की सरकार को केंद्र की सरकार की तरफ से मिल रही मदद को लेकर आइना दिखाने के साथ-साथ दोषारोपण से बचने की सलाह भी दी है.

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First published: April 10, 2020, 3:23 PM IST



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