संरक्षक श्रीचंद सुंदरानी का इस्तीफा, पर भंग युवा चैंबर समेत कई विंग समर्थन में आए

सबका संदेश न्यूज़ छत्तीसगढ़ रायपुर- छत्तीसगढ़ चैंबर में अब तक सबसे बड़ा बवाल हो गया। दो बार के चैंबर अध्यक्ष और 16 साल तक महामंत्री रहे श्रीचंद सुंदरानी ने गुरुवार को चैंबर संरक्षक पद से इस्तीफा दे दिया। वे 27 सालों से चैंबर से जुड़े थे। पिछले दिनों युवा चैंबर के भंग होने से सुंदरानी काफी नाराज थे। उन्होंने बुधवार को फेसबुक पर लिखा था कि उन्हें जो चुनौती दी जा रही है उसे स्वीकार करते हैं और गुरुवार को उन्होंने अपना इस्तीफा चैंबर अध्यक्ष जितेंद्र बरलोटा को भेज दिया।
चैंबर के सबसे बड़े नेता के इस्तीफा देने के साथ ही उनके समर्थकों ने भी चैंबर से दूरी बनानी शुरू कर दी है। चैंबर में सुंदरानी का खासा दखल है। सबसे ज्यादा समर्थक सदस्य और पदाधिकारी उन्हीं के माने जाते हैं। इस वजह से सुंदरानी के इस्तीफे के साथ ही चैंबर में दो फाड़ होना तय माना जा रहा है। सुंदरानी के इस्तीफे की खबर फैलने के तुरंत बाद ही भंग युवा चैंबर ने उनके साथ रहने की घोषणा कर दी। चैंबर में मनोनीत पदाधिकारियों की संख्या 150 से ज्यादा है।
इनमें ज्यादातर को सुंदरानी का समर्थक माना जाता है। ऐसी दशा में सुंदरानी के इस्तीफे के साथ ही चैंबर में चुनाव को लेकर अटकलें तेज हो गईं हैं। छत्तीसगढ़ चैंबर में विवाद की सुगबुगाहट राज्य में सत्ता परिवर्तन के साथ शुरू हुई। कांग्रेस की सरकार बनने के बाद से ही चैंबर में अब तक साइड लाइन रहने वाला दूसरा गुट सक्रिय हुआ और उसने श्रीचंद को किनारे करना शुरू कर दिया गया था। इसमें पूरनलाल अग्रवाल की अहम भूमिका होने की चर्चा रही। उनके साथ तीनों बड़े पदाधिकारी अध्यक्ष, महामंत्री और कोषाध्यक्ष भी हो गए।
इसके बाद से ही चैंबर में सुंदरानी और पूरनलाल का दो गुट बन गया। सुंदरानी समर्थकों का शुरू से ही आरोप है कि पूरनलाल अपने लिए कांग्रेस में राज्यमंत्री के दर्जा वाला बड़ा पद और बेटे के लिए पार्षद की टिकट चाह रहे हैं। महामंत्री लालचंद गुलवानी कांग्रेस सरकार में छत्तीसगढ़ सिंधी साहित्य अकादमी का दावा कर रहे हैं। इस वजह से चुनाव जीतकर आए पदाधिकारी एकजुट होकर सुंदरानी गुट को किनारे कर रहे थे।
इस्तीफा मुझे नहीं मिला
चैंबर की छवि खराब हुई
मामला सुलझा लेंगे
विज्ञापन समाचार हेतु सपर्क करे-9425569117/9993199117

