विश्व का पहला प्राकृतिक धाम बना दुर्ग जिले का विश्व पर्यावरण धाम,

स्वयं प्रकृति बना रही आध्यात्मिक धाम
दुर्ग। यूं तो आपने छत्तीसगढ़ के विभिन्न आश्रमों और धामों के दर्शन तो किए होंगे परंतु दुर्ग जिले का एक ऐसा धाम है जिस की संरचना स्वयं प्रकृति कर रही है जी हां हम बात कर रहे हैं। दुर्ग जिले के पाटन विधानसभा के ग्राम अमेरी से लगा हुआ विश्व पर्यावरण धाम के बारे में जिस की संरचना स्वयं प्रकृति कर रही है बात करें तो 3.30 एकड़ में फैले विश्व पर्यावरण धाम में पीपल, बेल, नीम ,आम और बरगद मुख्य रूप से लगे हुए हैं जिनका उल्लेख चिकित्सा की दृष्टि से औषधि के रूप में वे दो और पुराणों में विशेष उल्लेख है। बस्तर घोटूल की तर्ज पर यह विश्व पर्यावरण धाम आज से 14 वर्ष पूर्व स्थापित किया गया था जिसमें नवग्रह काल भैरव शिवलिंग हनुमान जी व माता तारिणी का अस्थाई मंदिर शामिल है ।छत्तीसगढ़ के इतिहास में विश्व का पहला अजूबा मंदिर जो नवग्रह के संविधान से तैयार किया जा रहा है जिसका मुख्य उद्देश्य सेवा वाह पर्यावरण का संरक्षण है विश्व पर्यावरण समन्वय समिति अमेरी के अध्यक्ष संत राम शिरोमणि दास ने बताया की हमारा उद्देश्य पर्यावरण को बढ़ाना है।
इस उद्देश्य को स्वयं प्रकृति पूरा कर रही है विश्व पर्यावरण धाम में छत्तीसगढ़ प्रदेश के कोने कोने से लोग धार्मिक पर्व पर इक_े होते हैं और धार्मिक आयोजनों पर अपनी उपस्थिति देते हैं । पूर्व में भी छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने भी यहां पर आकर 2000 आंवला वृक्षों को प्रदान कर समिति का हौसला बढ़ा लोगों को पर्यावरण के संरक्षण को लेकर एक अनूठी मिसाल पेश की थी। महीने में हर पूर्णिमा को विश्व पर्यावरण धाम में शुद्ध देसी गाय के दूध से खीर का प्रसाद वितरण किया जाता है जो प्रारंभ से ही आज तक चला रहा है रामायण सुंदरकांड आज अनुष्ठान भी किए जाते हैं विश्व पर्यावरण धाम के प्रवक्ता वैध रत्नाकर मिश्रा संस्थापक बाबा पंचराम एवं विश्व पर्यावरण समन्वय समिति के सभी पदाधिकारी गण हमेशा उपस्थित रहते है व पर्यावरण की सेवा करते है।
समिति के अध्यक्ष ने पर्यावरण प्रेमियों से यह अपील की है कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में पर्यावरण को संरक्षण दे व पाटन विधानसभा क्षेत्र मैं आकर विश्व पर्यावरण धाम में आए और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का ध्यान आकर्षित कराने में आप सभी सहयोग करें।


