मैं तो माटी का पुतला हूं, हनुमान जी ने भेजा है… में बोले ‘हनुमान अंश’ के सिंगर सुनील लोधी

हनुमान अंश’ के लोकप्रिय भजन ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डाल दई’ से घर-घर में पहचान बनाने वाले सिंगर सुनील लोधी अब किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं. 23 सितंबर को 2026 में पहुंचे सुनील ने अपनी बढ़ती पहचान और दर्शकों के प्यार पर खुलकर बात की. जब उनसे पूछा गया कि देश ही नहीं, बल्कि इंटरनेशनल स्तर पर भी पहचान मिलने पर वह क्या कहना चाहेंगे, तो उन्होंने इसका पूरा श्रेय अपने दर्शकों के प्यार, हनुमान जी की कृपा और मां सरस्वती के आशीर्वाद को दिया. सुनील ने कहा कि वह खुद को कुछ नहीं मानते, बल्कि हनुमान जी का भेजा हुआ एक माध्यम समझते हैं.
‘मैं तो माटी का पुतला हूं, हनुमान जी ने भेजा है…’ में सुनील लोधी ने अपनी सफलता को लेकर बेहद सादगी से कहा कि यह सब उनके दर्शकों के प्यार और हनुमान जी महाराज की कृपा है. उन्होंने कहा, “मैं तो कुछ नहीं हूं, बस एक माटी का पुतला हूं.” सुनील के मुताबिक, अगर हनुमान जी ने उन्हें धरती पर भेजा है तो उनकी यही इच्छा है कि वह भक्तों के लिए अच्छे-अच्छे भजन लेकर आएं और वह उसी काम को कर रहे हैं.
उन्होंने अपनी बढ़ती लोकप्रियता पर दर्शकों का धन्यवाद करते हुए कहा कि लोगों ने उन्हें ऊपर उठाया है और वह चाहते हैं कि उनका प्यार और सपोर्ट हमेशा बना रहे. सुनील की यही विनम्रता उनके प्रशंसकों को भी काफी पसंद आती है.
गांव से ट्रेन तक, ऐसे शुरू हुआ सुनील का सफर
मध्य प्रदेश के सागर जिले के बुंदेलखंड इलाके से आने वाले सुनील लोधी का सफर आसान नहीं रहा. वह जन्म से दृष्टिबाधित हैं और आर्थिक परिस्थितियों के कारण स्कूल भी नहीं जा सके. बचपन में ही उनकी रुचि संगीत में हो गई थी. करीब 10-11 साल की उम्र में उन्होंने बुजुर्गों के साथ बैठकर तमूरा बजाना सीखा और धीरे-धीरे भजन गाने लगे. बाद में उन्होंने ट्रेनों और स्थानीय कार्यक्रमों में भी अपनी आवाज का जादू दिखाया. सुनील की आवाज को सोशल मीडिया ने बड़ा मंच दिया. इस साल उनका भजन ‘ओ मोरे संकट के कटैया हनुमान’ वायरल हुआ और रिपोर्ट्स के मुताबिक इसे करोड़ों व्यूज मिले. इसके बाद उनकी आवाज मुंबई तक पहुंची और उन्हें फिल्म ‘हनुमान अंश’ में गाने का मौका मिला. फिल्म के ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डाल दई’ भजन ने उनकी पहचान को नई ऊंचाई दे दी.आज सुनील लोधी की आवाज सिर्फ एक फिल्म के गाने तक सीमित नहीं है. उनकी कहानी संघर्ष, लोकसंगीत और भक्ति से निकलकर बड़े मंच तक पहुंचने की कहानी बन चुकी है. NDTV Conclave में भी उन्होंने अपनी इस कामयाबी का श्रेय खुद को नहीं, बल्कि हनुमान जी, मां सरस्वती और अपने चाहने वालों को दिया.

