सौरव गांगुली को आज भी है मलाल, कप्तान रहते हुए लेना पड़ा था कड़ा फैसला

कोलकाता के चहेते बेटे सौरव गांगुली टीम इंडिया के महान कप्तानों में से एक हैं। गांगुली को ड्रेसिंग रूम में आक्रमकता जगाने के लिए जाना जाता है। उन्होंने टीम को बताया कि वह किसी भी जगह जीत दर्ज कर सकती है। गांगुली ने लगातार टीम के खिलाड़ियों का समर्थन किया और उन्हें अपने आप को अभिव्यक्त करने की इजाजत दी।  साल 2008 में रिटायर होने के बाद गांगुली क्रिकेट की प्रशासकीय गतिविधियों में काफी सक्रिय हुए और उन्होंने गेम में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दिया। साथ ही उन्होंने अपने क्रिकेट करियर की कई रोचक कहानियों का भी खुलासा किया। हाल ही में एक इंटरव्यू में उन्होंने कप्तान रहते हुए कड़ा फैसला लेने वाली बात का खुलासा किया। कोई क्रिकेट फैन शायद ही 2003 में वह दोपहर भूला होगा जब टीम इंडिया जोहानसबर्ग में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ फाइनल मुकाबला खेलने उतरी थी। टीम इंडिया के पास वर्ल्ड कप की ट्रॉफी उठाने का शानदार मौका था। हालांकि, मैच शुरू होने से पहले गांगुली ने एक आश्चर्यजनक फैसला लेकर कई फैंस को जोरदार झटका दिया था। टीम इंडिया ने फैसला किया कि अनुभवी लेग स्पिनर अनिल कुंबले को अंतिम एकादश में शामिल नहीं किया जाएगा, जिससे कई फैंस स्तब्ध रह गए थे। फाइनल में टीम इंडिया को ऑस्ट्रेलिया से शिकस्त झेलना पड़ी और टीम इंडिया के दूसरी बार वर्ल्ड कप जीतने का सपना टूट गया। फाइनल के बाद कई बार कुंबले को हरभजन सिंह के लिए अपनी जगह गंवाना पड़ी। गांगुली ने स्वीकार किया कि कुंबले को बाहर करना उनकी कप्तानी के कड़े फैसलों में से एक रहा। गांगुली ने स्पोर्ट्स्टार को दिए इंटरव्यू में कहा, ‘कुंबले को अंतिम एकादश से बाहर करना कड़ा फैसला था। वह महान और शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी हैं। उनको बाहर करना मेरा सबसे कड़े फैसलों में से एक रहा।’