गौसेवक बनकर घायल पशुओं की सेवा करते खिलेश्वर

पाटन—-तहसील मुख्यालय से कुछ ही दुरी पर बसा तरीघाट गांव, जहां गौसेवा की मिशाल पेश कर रहे हैं खिलेश्वर सिन्हा, आजकल लोग पशुओं को घर में बांध नहीं रखते क्योंकि चारे की विकराल समस्या उपर से बदलते समय में लोग मौडर्न होते जा रहे हैं, जिससे पशुओ को खुले में छोड़ देते हैं, गायो के आलावा अन्य पशुधन भी लोग नहीं रखना चाह रहे हैं जिससे पशु आवारा होते जा रहे हैं,अतः आये दिन सड़कों पर डेरा डाले रखते हैं जिससे दुर्घटना की सम्भावना अधिक रहती हैं, बहुत से जानवर घायल अवस्था में पढ़े रहते है जिसका देखरेख करने वाले कोई नहीं रहता, इस बात को देख कर खिलेश्वर के मन को बहुत पीढा होती हैं, जानवर भी तो एक जीव है अतः खिलेश्वर ने मन मे सोचा कि पशुओं की इलाज हेतु उचित व्यवस्था की जाए ताकि उन्हें बचाया जा सके नयी जीवन प्रदान किया जाए,खिलेश्वर रूंगटा ग्रुप आफ इंजीनियरिंग कॉलेज भिलाई से बी . ई. की पढाई पुरी की उसने बडे बडे मल्टीनेशनल कंपनियों में काम करने की बजाय गांव में रहकर अपने पिताजी के साथ खेती बाड़ी मे सहयोग करने का सोचा और नये तकनीक से कृषि को व्यवसाय बनाने के उद्देशय रखते थे ताकी किसानों की स्थिति में सुधार होगा तब वे गांव आये, परंतु कुछ समय बाद वे देख रहे थे कि शहर तो शहर गांव में भी जानवरों की स्थिति गंभीर हालत में है,उनके मन में बहुत कष्ट हुआ कि पशुओं की हालत दिनबदिन बदलती परिस्थितियों में और गंभीर हो रही हैं, तब वे गौसेवा मे लग गये अपने दोस्तों की मदद से घायल जानवरों, पशुओं की सेवा करते रहते हैं,

रूंगटा ग्रुप आफ इंजीनियरिंग कॉलेज से बी.ई . की पढाई

खिलेश्वर सिन्हा बचपन से ही मेधावी छात्र रहा है, अतः पारिवारिक सम्पन्नता होने के कारण घर वाले बी .ई .करवाने के उदेश्य से रूंगटा ग्रुप आफ इंजीनियरिंग कॉलेज आफ भिलाई मे प्रवेश लेकर पढाई पुरी की लेकिन वे मल्टीनेशनल कंपनियों में काम करने के बजाए अपने पिता जी के साथ नये तकनीक से खेती कर किसानी मे जीवन व्यतीत करने का सोचा

पशु विभाग भी करते हैं मदद

खिलेश्वर के काम से गांव के लोगों मे नया जोश भर देता है, गौसेवा करने में पशु विभाग के डाक्टर बहुत मदद करते हैं क्योंकि घायल अवस्था में होने के कारण सीधे तौर पर इलाज करने की जिम्मेवारी डाक्टरों की होती हैं अतः वे खिलेश्वर के साथ घायल पशुओं के इलाज में हरसम्भव मदद करते हैं

दोस्तों का साथ भरपूर होता है

खिलेश्वर के गौसेवा को देखकर दोस्तों मे खुशी होती हैं, चंद्रकांत साहू बताते है कि उनके पक्के इरादे से ही गौसेवा मे लोगों की रुचि रखने लगे हैं, मुकेश सेन व तजेंद्र सिन्हा, डोमेश व सहयोग भरपूर होता है

माता पिता व परिवार भी सहयोग मे आगे

हर माता पिता चाहता है कि उसका बेटा अच्छी शिक्षा प्राप्त कर बडे कम्पनी में जाब करे,परिवार का पालन पोषण कर अपनी जिम्मेदारी निभाए,उसी तरह से खिलेश्वर के माता पिता ने भी सोचते है लेकिन पारिवारिक सम्पन्नता,उपर से खिलेश्वर का बचपन से ही जानवरों के प्रति लगाव प्रेम भाव रहा है, माता पिता कहते है कि खिलेश्वर अपने भविष्य में अच्छा नागरिक बने और साथ ही साथ गौसेवा मे लगे रहे,उनकी भविष्य में कोई पाबंदी नहीं है,अपने मन के अनुसार जिम्मेदार नागरिक की भुमिका निभाए

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